गाँधी तुम हो, युग-परिवर्तक, युग-संस्थापक
तुम्हे युग-युग तक युग का नमस्कार
नाम सदा रहेगा अम्र बापू तुम्हारा
तुम तो हो सूरज की सन्तान बापू.आँख पे ऐनक, हाथ में लाठी
बापू चलते सीना ताने शान से
दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग-ढाल के
साबरमती के संत मेरे बापू हैं कमाल के.
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