भक्ति क्या है?
भक्ति क्या है??,
“भक्ति” हाथ पैरो से नहीं होती है।
वर्ना विकलांग कभी नहीं कर पाते।
भक्ति ना ही आँखो से होती है
वर्ना सूरदास जी कभी नहीं कर पाते।
ना ही भक्ति
बोलने सुनने से होती है वर्ना “गूँगे” “बैहरे” कभी नहीं कर पाते।
ना ही “भक्ति” धन और ताकत से
होती है वर्ना गरीब और कमजोर
कभी नहीं कर पाते।
“भक्ति” केवल भाव से होती है
एक अहसास है “भक्ति”
जो हृदय से होकर विचारों में आती है
और हमारी आत्मा से जुड़ जाती है।
“भक्ति” भाव का सच्चा सागर है।
I was just looking for this info for a while. After 6 hours of continuous Googleing, at last I got it in your web site. I wonder what is the lack of Google strategy that don’t rank this kind of informative websites in top of the list. Generally the top web sites are full of garbage.
certainly like your web-site but you have to check the spelling on quite a few of your posts. Several of them are rife with spelling problems and I to find it very troublesome to tell the truth on the other hand I will surely come back again.